by- मधु बघेल

आंखों में आंसू,

पैरों में छाले लिए,

चल रहा है वो, 

इस नाकामी के सफर को तय किए।

नाकाम नेताओं के वादे हुए, 

नाकाम ग़रीबी हटाने के इरादे हुए,

नाकामी है आज चारों तरफ़,


रेडियो बज रहा है मन की बात करते हुए,

चल रहा है वो,

इस नाकामी के सफर को तय किए।


नाकामी की वो मौत हुई,

नाकाम मांओं की गोद हुई,

नाकामी है अनाथों की चीखों में,


छप्पन इंच का सीना तान, देश, देश से

लड़ते हुए

चल रहा है वो,

इस नाकामी के सफर को तय किए।

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