दोस्तों, भंवरी (साथिन भटेरी) के पति, मोहन जी की आज,28 सितम्बर को मृत्यु हो गई। बे पिछले 30 दिन से कैंसर को पीड़ा से अलग अलग अस्पताल में थे। और ब्रिहस्पत्वार को घर ले गए I दाह संस्कार आज ही किया जा रहा है। उनके जाने से भंवरी की हालत अभी बहुत बुरी थी। बहुत अफ़सोस में थी I 45 साल का साथ उनके साथ I

भंवरी की बेटी रामेश्वरी और बहू शीला ने मेरे को फ़ोन पर बताया। सभी बच्चों ने बहतु सेवा की I दिन रात अस्पताल डो लोग हमेशा रहे I या तो बेटा मुकेश और बहु शीला जी नर्स है या बेटी रामेश्वरी और उसके पति रहे I बहुत ही परिपक्व तरीके से निर्णय लिए I इस तरह का सेवा भाव बहुत ही सराहनीय है I

मोहनजी इतिहास में अपना नाम लिख कर गए। हमेशा वे ज़बरदस्त सहयोगी थे, भंवरी के महिला विकास के काम से । उन्होंने जो शिक्षा, भंवरी बाहर गांव में देती थी, वे उसे घर पर उतारते थे। बच्चों को पढ़ाया। शादी खूब late की बेटे की। बेटी का गौना खूब late किया, बेटी की शादी भंवरी के साथिन बनने से पहले हो गई थी । उसे BA karne diya. वे खाना भी बनाते थे। स्त्री पुरुष के अलग काम की भूमिका को तोड़ा। और जब 1992 में भंवरी का सामूहिक बालात्कार उनकी आंखों के सामने हुआ, वे पूरी तरह भंवरी के साथ खड़े रहे। पूरा support किया। गांव व जाति से निकाला हुआ वे भंवरी के साथ खड़े रहे।पुलिस ने बहुत अपमानित किया उन्होंने केवल भंवरी का हौसला बढाया I फैसला विरोध में आया, वे फिर भी टस से मस नही हुए। उन्ही के कारण भंवरी गांव, गांव, जयपुर आदि चली आती थी, कोई काम हो वहां पहुँच जाती थी, आखिर cases तो उसके पास दूर दूर से आते थे ।

NREGA हो, राशन हो, स्कूल में मध्यान्ह भोजन हो, सब पर निघाएं, scholarship, scootie, सभी तरह के फर्जीवाडा को एक्स्पोसे किया और हक़ दिलवाया I मोहनजी सभी काम गाय का काम, चारे के काम और सभी घर का काम कर लेते, तभी भंवरी यह सब कर सकती थी ।

28 साल से न्याय का इंतज़ार भी कर रहे थे।

25 साल तो trial court के फैसले को होने जा रहे हैं, नवंबर में हो जाएगा।

25 साल अपील के हाई कोर्ट में अगले साल की जनवरी में हो जाएगा।

वे न्याय की राह देखते, देखते चले गए।

5 में से 4 रेप accused तो दुनिया ही छोड़ कर चले गए।

भंवरी कहती है, सरकार की अदालत से तो न्याय नाहीमिल, शायद भगवान की अदालत से मिल गया। भंवरी के जीवन का नया अध्याय, मोहनजी के बगैर जीवन, कैसे चलेगा, में सोच भी नही सकती हूँ। शायद कुछ अच्छा ही निकले, प्रीतम ने बहुत सहज रूप से कहा। अलविदा मोहनजी, आप हमेशा हमारे ज़हन में रहोगे।

courtesy Kavita Srivastava

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