#metoo मी टू….

तब,
ज़ख्म और भी गहरे हो जाते है
जब
खुदको प्रगतीशील कहनेवाले थाम लेते है,
न्याय का तराजू अपने हांथ मे
जहाँ,
वही लोग चला लेते हे मुकदमा
और सुना देते है फैसला,
सच और झूट का
अपनी ब्राम्हणी पितृसत्तात्मक विचारधारा पर,
चलनेवाली अदालत का
जहाँ वही होते है सबुत,गवाह, वकील, और जज भी
सच और झूट का फैसला करनेवाले
वही लोग करते है तै,
की हमपर हुवे जुल्म का बयान
हम कब और कैसे करे?

जहाँ,
पुछे जाते है सवाल आपके चरित्र को लेकर
और उडाया जाता है मजाक मिटू मिटू कहकर………
जहाँ
पीडित को ही बनाया जाता है, गुनहगार,
शोषित को ही मागा जाता है सबुत, अपने शोषित होने का
जहाँ
वही, करता है बलात्कार वही देता है क्लीनचिट
और बाटता है सर्टिफिकट चरित्र का

जहाँ,
मर्द (प्रगतिशील) कहने लगते है, की,
यह तो सिर्फ सजीश है मर्दो को बदनाम करने कीं
कुछ मर्द कहते है की,
अब सो चुहें खाकर बिल्ली हज को चली
ना जाने कितनी बार कितनो के साथ सोई होगी
कोई कहता है, इतने दिनों तक तो खाई मलाई
जब रास ना आई तो दे दी #metoo की दुहाई।

……………..हाहाहाहाहा

तब,
जख्म और भी गहरे हो जाते है जब,
एक मर्द से दुसरे मर्द को मिलने लगता है भाईचारा
मर्द होने की कसौटी पर.
वर्गभेद,जातिभेद पर जागृत रहनेवाला मर्द
उड़ाता है हँसी लिंगभेद पर,
वह जुट जाता है और तो
औरतो में संभ्रम निर्माण करने मे,
वह जानकर भी अनजान बनने लगता है
चाहे औरते किसी भी वर्ग की हो
वह शोषित ही होती है।


तो साथी,
क्या सच मे इस ब्राम्हणी पितृसत्तात्मक समाजव्यवस्था में
तुम हमारे साथ हो?
या दे रहे हो खुद को भी धोखा प्रगतिलशील समझने का?

तो साथी,
फैक दो यह झूट का मुखोटा
और चलो हमारे साथ लड़ने लड़ाई,
क्यों की “समर” अभी बाकी है।
औरत और मर्द की नही समानता की लढाई लढनेवाली
तुम्हारी साथी
#रुपाली_जाधव ( #कबीर_कला_मंच,_पुणे )

#MeToo

English Translation

By – raghuram s godavarthi

Then,
the wounds deepen
when
self-proclaimed progressives claim
themselves the arbiters of law
where,
they alone argue the cases
and pronounce judgment
upon the truth and falsehood
of their Brahminical patriarchy
and its courts of trial
wherein they alone are –
evidence and witness
advocate and judge
sifting truth and falsehood
they alone make the call
as to when, where we report
the crimes visited upon us

where,
questions are asked of one’s character
and jokes cracked
with #MeToo the refrain
where,
victims are declared violators
the oppressed need show proof
that they are indeed oppressed
where,
the rapist also issues clean chits
distributes character certificates
where,
the male (progressive) says
‘tis but a ploy to defame men
while other males exclaim


look who’s discovered piety
having slept with god-knows-how-many
and yet others retort
long-enjoyed benefits forgotten
screaming #MeToo for what joy
(ha ha ha ha ha ha!)

then,
the wounds deepen further when,
Men discover in other men brotherhood
at the point of denouncing their manhood
The woke male with hot takes on caste,
class
Merely sniggers at sexism
And turns more of his attention
to gaslighting more women
Feigning with all wokeness ignorance
Never mind the caste of the woman
All she ever is, is harassed

So, comrade,
Are you truly, in this Brahminical
patriarchal social establishment,
Truly our ally?
Or are you deluding yourself with pretend-
wokeness?
So, comrade,
Fling away this mask of fakeness
And march lockstep with us in our
agitation –
for destiny as yet awaits us all
Battling not for women vs men but for
equality
Your comrade
Rupali Jadhav (Kabir Kala Manch)
#MeToo

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